आपका नाम अली, उपाधि अबुल हसन और प्रसिद्ध उपनाम "रेज़ा" है। आप आठवें इमाम और दसवें मासूम हैं आपकी विलादत का वर्ष 148 या 153 है और जन्मतिथि 11 ज़ीकादह है।
चूंकि मौलाए कायनात अमीरूल मोमिनीन हज़रत अली अलैहिस्सलाम की उपाधि भी अबूल हसन थी इसलिए आपको अबुल हसन सानी (द्वतीय) कहते हैं। आपका प्रसिद्ध उपनाम रेज़ा है जिसके लिए उयूनो अखबारिर रेज़ा में रिवायत है कि आपके इस उपनाम का कारण यह था कि दोस्त और दुश्मन सब आपकी उत्तराधिकार से सहमत थे जबकि आपके अलावा आपके पूर्वजों में किसी के साथ ऐसा नहीं हुआ था। आपकी मां मोरक्को से प्रवास करके मदीना आई थीं।
आपका शैक्षिक एवं नैतिक व्यक्तित्व
आपकी दुनिया से दूरी, नैतिकता और शैक्षिक एवं आध्यात्मिक व्यक्तित् और शियों का आप पर विश्वास कारण हुआ कि न केवल मदीना में बल्कि सभी इस्लामी देशों में रसूले इस्लाम (स.) के परिवार के सबसे प्रिय व्यक्ति बन गए और मुसलमान आपको सबसे बड़ा धार्मिक इंसान समझते थे और आपका नाम सलवात और सलाम के साथ लेते थे। पच्चीस साल से कम उम्र में मस्जिदुन नबी (स.) में बैठकर फ़तवा दिया करते थे।
आपका ज्ञान बहुत अधिक था और आपका चलन पैगम्बर (स.) की तरह था आप धैर्य एवं उपकार हर एक लिए आम था। किसी को भी अपनी ज़बान और बयान से दुखी नहीं करते थे, जब तक सामने की बात समाप्त न हो बीच में नहीं बोलते थे, किसी मोहताज को खाली हाथ नहीं लौटा थे, मेहमानों के सामने तकिया नहीं करते और पैर नहीं फैलाते थे।
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